#लंका पर #चढ़ाई हेतु #समुद्र की लहरों पर #पुल निर्माण जारी था। #वानर_भालू बड़े बड़े पत्थरों पर "राम" नाम अंकित कर #नल_नील को थमा रहे थे। नल-नील #पत्थर पानी में छोड़ रहे थे और पत्थर तैर रहे थे। एक शिला पर अनुज लक्ष्मण के साथ विराजित #प्रभु_श्री_राम कौतुहल से यह दृश्य देख रहे थे। स्वयं यह प्रयोग करने का मन जिज्ञासावश उन्हें भी हुआ। सोचा कि एकांत में जा कर ऐसा किया जाए। ताकि कोई यह देख न सके। प्रभु उठ कर टहलते हुए इस समूह से कुछ दूर गए। सबसे निगाह बचा कर एक शिलाखण्ड उठाया और उसे धीरे से जलधारा में छोड़ दिया। पत्थर पल भर में पानी में डूब गया। आश्चर्यचकित प्रभु श्री राम ने दोबारा प्रयास किया। इस बार भी पत्थर पानी में डूब गया। दूर आ कर यह कोशिश करने वाले श्री राम ने यह सोचकर राहत की सांस ली कि चलो किसी को इस बारे में पता नहीं चला। उन्हें पता नहीं था कि एक शिला के पीछे छिपे #हनुमान_जी सब देख चुके हैं। जो साये की तरह उनके पीछे पीछे आए थे। जैसे ही श्री राम जी की दृष्टि मुस्कुराते हुए हनुमान जी पर पड़ी। वे चौंक गए और झेंप मिटाने का प्रयास करने लगे। प्रभु श्री राम ने हनुमान जी से आग्रह किया कि वे यह बात किसी को भी न बताएं। अन्यथा दल का मनोबल टूटेगा। सभी को लगेगा कि जिनके नाम के पत्थर तैर रहे हैं उनके अपने हाथ पत्थर नहीं तेरा पाए। चतुर सुजान श्री हनुमान जी ने श्री राम की को जो उत्तर दिया, वो उनकी अगाध भक्ति और चातुर्य का प्रमाण है। हनुमान जी ने कहा कि प्रभु! इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है। आपके हाथ जिसे भी छोड़ेंगे, वो कभी तैर नहीं सकता। क्योंकि आपकी कृपा के बिना उसका डूबना पहले से तय है। उत्तर से आह्लादित प्रभु ने अपने अनन्य साधक को गले से लगा लिया। प्रस्तुति- 【प्रणय प्रभात】 #जय_रामजी_की। #जय_जय_श्री_हनुमानप्रीति प्रणय भटनागर

No comments:
Post a Comment