■ आपके घर में उजाले हो गए। हम चिताओं के हवाले हो गए।। ■ सुर्खियों में झूठ ने पाई जगह।बदचलन अदबी रिसाले हो गए।। ■ पुतलियां देशी विदेशी उंगलियां।अब ये मंज़र देखे-भाले हो गए।। ■ कल तलक कपड़ा न था तन पे हुजूर! आप कब से जेब वाले हो गए? ■ दोस्तों की मेहरबानी उठ गई।और हम तक़दीर वाले हो गए।।।
■ हम वफ़ा की राह चल के आए हैं।देखिए, पांवों में छाले हो गए।।
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