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Wednesday, May 20, 2020

#सामयिक_ग़ज़ल बदचलन अदबी रिसाले हो गए 【प्रणय प्रभात】

■ आपके घर में उजाले हो गए। हम चिताओं के हवाले हो गए।।   ■ सुर्खियों में झूठ ने पाई जगह।बदचलन अदबी रिसाले हो गए।।  ■ पुतलियां देशी विदेशी उंगलियां।अब ये मंज़र देखे-भाले हो गए।।  ■ कल तलक कपड़ा न था तन पे हुजूर!                                  आप कब से जेब वाले हो गए?    ■ दोस्तों की मेहरबानी उठ गई।और हम तक़दीर वाले हो गए।।।  ■ हम वफ़ा की राह चल के आए हैं।देखिए, पांवों में छाले हो गए।।

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