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Wednesday, May 20, 2020

#तेवरी / #कक्का। (ठेठ देशी ठाठ की एक ग़ज़ल) 【प्रणय प्रभात】

■ गेहूँ संग गुड़ लइयो कक्का!  कल बंगले पे अइयो कक्का।।      ■ होइहि वहि जो राम रचि राखा।मोकू मत समझइयो कक्का।।      ■ बच्चे आवेंगे भादों में।    गुड़धानी भिजवइयो कक्का।।     ■ कुप्पी, खुरपी घर से लइयो,   पेड़ लगा के जइयो कक्का।।■झूठ-मूठ में शकल रुआँसी।   मोहे मत दिखलइयो कक्का।।     ■ कित्ता सोना धरती उगली?   सब सच-सच बतलइयो कक्का।. ■ देसी घी के दाल चूरमा.        खेत बुला खिलवइयो कक्का।"    ■ आला अफसर कछु भी पूँछें।कोरी नाड़ हिलइयो कक्का।।       ■ भूल जाये यदि सारी बातें।  सूरत नहीं दिखइयो कक्का।।     ☺️☺️☺️☺️☺️☺️☺️☺️☺️☺️#मुंशी_प्रेमचंद_के_युग_को_जीवंत_रखे__है_नौकरशाही_आज_भीDr. Kumar Vishwas

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