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Tuesday, May 19, 2020

लघुकथा / नेता

            【प्रणय प्रभात】
हम हॉस्टल में रूम पार्टनर थे। मैं दोनों समय खाना बनाता था। वो बातें बनाता था। मैं धोए गए कपड़ों पर प्रेस बनाता था और वो बातें। मैं प्रॉजेक्ट बनाने में रुचि रखता था। वो बातें ही बना पाता था। मैं हर तरह की बिगड़ी बना लेता था। उसे खाली बातें ही बनाना आता था। बरसों बाद मैं एक अदना सा लेखक बन गया। आज कहानियां बनाता हूँ। वो आला दर्जे का नेता बन गया है। देश बनाने के नाम पर जनता को बना रहा है।
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