【प्रणय प्रभात】 बिल बनते हैं सांझ सकारे।। मिल कर करते वारे-न्यारे।" सेनेटाइज़" करते सड़कें।" सादा पानी" के फ़व्वारे।। अस्पताल में अफ़रा-तफ़री। रोगी भटकें मारे-मारे।। काग़ज़ पे कुछ सड़कों पे कुछ। रोज़ मुनादी बिना विचारे।। आज़िज़ आए हद से ज़्यादा। नियम मानने वाले सारे।। चरस बंटी नौकरशाहों को।
दिखा रहे हैं दिन में तारे।। #Covid19 #lockdown
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