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Wednesday, May 20, 2020

#तेवरी / सादा पानी के फ़व्वारे (देशी अंदाज़ में एक और ग़ज़ल)

             【प्रणय प्रभात】          बिल बनते हैं सांझ सकारे।।     मिल कर करते वारे-न्यारे।"      सेनेटाइज़" करते सड़कें।"        सादा पानी" के फ़व्वारे।।   अस्पताल में अफ़रा-तफ़री।     रोगी भटकें मारे-मारे।।        काग़ज़ पे कुछ सड़कों पे कुछ।  रोज़ मुनादी बिना विचारे।।  आज़िज़ आए हद से ज़्यादा।  नियम मानने वाले सारे।।        चरस बंटी नौकरशाहों को।      दिखा रहे हैं दिन में तारे।।                        #Covid19 #lockdown

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