■ तू ऐसा है, तो क्या तू है?तंत्र यही है तो फिर थू है।।■ मत दे परिचय मुझे पता है।वैशाली की नगर-वधू है।।■ बतलाता फिरता है मेहंदी।हाथों में जो लगा लहू है।।■ तेरी दुनिया मरघट जिसमें।बू का मतलब बस बदबू है।।■ ये अंधेर नगरी चौपट की।जिस को देखो बेकावू है।।■ ऊधो-माधो एक सरीखे।वो फांकू है ये हांकू है।। #प्रणय_प्रभात
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