#लघुकथा / #नक़ाब
"【 प्रणय प्रभात】
"एक बात तो है भाई! इस वायरस ने लोगों के चेहरों पर नक़ाब तो चढ़वा दिए।' लाला जी ने गैस सिलेंडर ले कर आए डिलेवरी-मेन से कहा। डिलेवरी-मेन ने अंगोछे से चेहरे पर आया पसीना पोंछा और बुदबुदाने वाले लहजे में जवाब दिया-
'नक़ाब चढ़ने का तो पता नहीं बाऊजी! हां, कइयों के चेहरों से शराफ़त के नक़ाब उतरवा ज़रूर दिए। इस तार्किक जवाब पर लालाजी अवाक थे। सच मे, और क्या जवाब होता इस कड़ी सच्चाई का?
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#दूसरा_पहलू

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