Friday, May 22, 2020
#सीधी_सपाट_खोले_कपाट (पढ़ लो, समझ लो, विचार लो)"
एक कंकरी फेंक झील में लहरें ला देना।तेल छिड़क के पानी में भी आग लगा देना।।पतझड़ में सूखे वृक्षों की शाख हिला देना।मस्त पवन के झोंको में भी गरल मिला देना।।सन्नाटों को बेध चीखना शोर मचा देना।निद्रामग्न परिन्दों को बेवक़्त जगा देना।।जिस थाली में खाना उसमें छेद बना देना।शांत क़बीलों में घुल मिल के रार ठना देना।।मलय पवन के झोंकों में दुर्गंध घोल देना।जोड़े रखने वाली गांठें सभी खोल देना।।पंख नोच लेना तितली के भ्रमर मार देना।जिए चैन से स्वयं वही सब पल बिसार देना।।आनंदित करते कलरव को कोलाहल करना।बच्चों की मासूम सोच में कालकूट भरना।।नैतिकता वाले बस्तों में आग लगा देना।पंख खोलते चूजों में उन्माद जगा देना।।मादक सुर लहरी को पल में क्रंदन कर देना।बोझिल बोखिल आँखों में अंगारे भर देना।।नहीं समझ इन सबसे तेरा नाता है।मुझको भी हर खेल खेलनाआता है।।मुझको अपनी क्षमताओं पर दर्प नहीं।भूल गया है तू मानव है सर्प नहीं।।मानव मन में मानवता की आस जगा।मत मधुवन में वैमनस्य की आग लगा।।अपने ही घर को यदि मरघट कर देगा।उपवन की क्यारी में शोणित भर देगा।।यूं फूंकेगा ऊपर जाती सीढ़ी को।क्या देकर जाएगा भावी पीढ़ी को??समय अधिक ना शेष विशेष यही दो पल।मिलकर सोचें कैसे सुंदर होगा कल।। #प्रणय_प्रभात
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