Powered By Blogger

Wednesday, May 20, 2020

#ग़ज़ल / न्यौता है अमराई का। 【प्रणय प्रभात】

■ कुछ दिन जीवन जी के देखोछोड़ो लोभ कमाई का।गाँव बुलाता है आ जाओ न्योता है अमराई का।।।                         ■ टूटा बाप दुआ करता हैबेटे को कुछ अक़्ल मिले।उस पागल को चर्राया है शौक़ बहुत ठकुराई का।।■ अब केवल नूराकुश्ती हैतुमको कहाँ मयस्सर वो।जो दंगल हमने देखा था आलम का मीनाई का।। ■ यहाँ तख़त पर चढ़ी खड़ाऊ राज चला के दिखा गई।पता नहीं किसने सिखलाया,रिज़्क़ हड़पना भाई का।।।                              ■ बेमतलब का शोर मचा के अपनी पोल दिखाओ मत।सुनो नगाड़ों! तुमसे इतना कहना है शहनाई का।।😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢#आगाह_करती_है_ग़ज़ल

No comments:

Post a Comment