केवल ज्ञापन लाया है बे! किस बस्ती से धाया है बे?? भूल गया क्या विप्र सुदामा? बिना पुटलिया आया है बे!! न्हा-धो के टिपटॉप तो होता! कैसा स्वांग बनाया है बे!! बिसर गया सब सेवा-पूजा? किस जननो का जाया है बे?? लगता था कुछ है अंटी में। तब तुझको बिठलाया है बे!! पेट दिख रहा फूला-फूला! सुबह-सुबह क्या खाया है बे?? छोड़ ये बातें इतना बतला! अब के क्या उपजाया है बे?? कुछ लाता सीधे आ जाता। बेमतलब भैराया है बे!! 😢😢😢😢😢😢👍😢
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