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Tuesday, May 19, 2020

लघुकथा / आराम

           【प्रणय प्रभात】
मैडम आराम-तलब थीं। खाना-पीना और आराम फ़रमान पसंद था। सुनना या समझना भी नापसंद था। संक्रमण के दौर में भी मुँहलगी महरी को काम पर बनाए रखा। एक दिन बर्तन माँजते समय खांसती महरी कहीं से लाए वायरस छोड़ गई। अब मैडम परिवार के बाकी सदस्यों के साथ अस्पताल की मेहमान हैं और आइसोलेट होकर आराम फ़रमा रही हैं। महरी अब भी आराम के अवसर सौगात में देती घूम रही है।
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