खेल दिखाते हल्के भारी।हम सब बंदर राम मदारी।।- साँस गिने डमरू की लय पे।काल गले में रस्सी डारी।- जब ललाट वनवास लिखा हो।फिर काहे के महल अटारी।।- सँभल सँभल के पग धरना है।जीवन इक तलवार दुधारी।।- समय का डंडा करेइशारा।कब आएगी किसकी बारी।।- बुझती आँखें बता रही हैं।देख चुकीं दुनिया की यारी।।- मुँह देखे की प्रीत निभाना।"प्रणय" यही है दुनियादारी।।
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