Thursday, June 18, 2020
#भावाभिव्यक्ति#पिता_को_याद_क्यों_करूं? 【प्रणय प्रभात】"
"मैं अपने पिता को याद नहीं करताकभी नहीं, कभी भी नहीं।और क्यों करूं याद?याद भी उन्हें, जिन्हें कभी भूला ही नहीं,जो शिलालेख पर अंकित वाक्य की तरह,कालजयी हैं मेरे मानस-पटल पर।कौन कहता है कि वो नहीं हैंमैं कहता हूं कि वो आज भी यहीं हैं,मेरे कर्म में, मेरे धर्म में,मेरे जहन में, मेरे मर्म में।मेरे आचार-विचार-व्यवहार में,मेरी हरेक जीत में और हार में।यहां तक कि मेरी सभ्यता और संस्कार में।मुझे महसूस होता है पल-पल पिता के साथ का,मेरा शीश सतत स्पर्श पाता है पिता के हाथ का।मेरे लिए पितृ-दिवस कोई एक दिनी त्यौहार नहीं,मेरे लिए हर दिन पितृ-दिवस हैक्योंकि मेरे अंदर मेरे पिता आज भी हैंजो जीवित रहेंगे मेरे जीवन तक और उसके बाद मेरे सूक्ष्म स्वरूप मेंपहुंच जाऐंगे अपने वंश की अगली पीढ़ी में।सिर्फ इसलिए कि मैने अपने में अपने पिता को जिया है,आखिर मेरे पास जो भी है उन्हीं से तो लिया है।।"(अपने जीवनदाता, अपने मार्गदर्शी, अपने प्रेरणास्त्रोत अपने आदर्श पापा को उनके बेटे की ओर से सादर समर्पित काव्यात्मक भावाभिव्यक्ति)
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