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Wednesday, June 17, 2020

#गीत / #सुख_दुःख 【प्रणय प्रभात】

अगर वो अपनी लगती है तो यह कैसे पराया है?ख़ुशी जिसने बनाई है कि उसी ने दुःख बनाया है।।◆ हमें मीठा निगलने कटु उगलने की जो आदत है।उसी कारण खुशी की चाह है दुःख से शिकायत है।।ये सोचो कल बहिन आई थी भाई आज आया है।।ख़ुशी जिसने बनाई है कि उसी ने दुःख बनाया है।।◆ लता, पत्ते, सुमन, फल और तरु उपवन सजाते हैं।मगर क्यों भूलिए उद्यान में कंटक भी आते हैं।।इन्हीं ने अनगिनत पुष्पों का जीवन तक बचाया है।।ख़ुशी जिसने बनाई है कि उसी ने दुःख बनाया है।।◆ बनाएं दृष्टि रुचि अरु सोच सम आदर करें दुःख का।बिना इनके भला क्या स्वाद जीवन में किसी सुख का?वो दुःख ही हैं जिन्होंने ईष्ट का सुमिरन कराया है।।ख़ुशी जिसने बनाई है कि उसी ने दुःख बनाया है।।😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊

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