शवयात्रा कस्बे के बीच से गुज़र रही थी। कुल आधा दर्ज़न लोग थे। पाँच ज़िंदा और एक मुर्दा। चार अर्थी उठाए थे। एक हँडिया लिए आगे चल रहा था। सरकारी फ़रमान का पालन जो ज़रूरी था। रास्ते में मदिरा के ठेके पर जमा आधा सैकड़ा लोगों ने एक उचटती सी नज़र इस नज़ारे पर डाली। देखते ही देखते शवयात्रा आगे गुज़र गई। 😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢
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